Sunday, July 24, 2011

Imrans Poetry from Zindagi Na Milegi Dobara

Following the Scuba Dive
पिघले नीलम सा बहता हुआ ये समां
नीली नीली सी खामोषिया
ना कही है जमीन ना कही आसमान
सरसराती हुई तहनिया, पत्तिया
कह रही है की बस एक तुम हो यहाँ

सिर्फ मैं हूँ, मेरी साँसे हैं और मेरी धडकने

ऐसीं गहराइयाँ ऐसीं तनहैया और मैं , सिर्फ मैं

अपने होने पे मूज़कों यकीन आ गया

Following the departure from Bruno

एक बात होटो तक हैं जो आई नहीं

बस आँखों से है झाक्तीं

तुमसे कभी मुझसे कभी

कुछ लब्ज हैं वोह मांगती

जिनको पहन की होटो तक आजाये वोह

आवाज की बाहों में बाहे डाले इठलाये वोह

लेकिन जो ये बात हैं , एहसास ही एहसास है

खुशबू से है जो हवान में तैरती

खुशबू जो बेआवाज हैं

जिसका पता तुमको भी हैं,

जिसकी खबर मुझको भी हैं

दुनीया से भी छूपता नहीं

ये जाने कैसा राज हैं

Following the dark night in the dessert

जब जब दर्द का बादल छाया

जब गम का साया लहरायाँ

जब आसूं पलकों तक आया

जब यह तनहा दिल घबराया

हमने दिल को ये समझाया

दिल आखिर तू क्यूं रोता हैं

दुनिया में यूव ही होता हैं

ये जो गहरें सन्नाटे है

वक़्त सबको ही बाटे हैं

थोडा गम है सबका हिस्सा

थोड़ी धुप है सबका हिस्सा

आग तेरी बेकार ही ना बहें

हर पल एक नया मौसम हैं

क्यूँ तू ऐसे बल खोता है

दिल आखिर तू क्यूँ रोता है

Final scene

दिलो में तुम अपनी बेताबियाँ लेकर चल रहे हो तो जिन्दा हो तुम

नजर में ख्वाबों की बिजलिया लेकर चल रहे हो तो जिन्दा हो तुम

हवान की झोकों के जैसे आजाद होके जिन्दा रहना सीखों

तुम  एक  दरियां के लहरों के जैसे बहना सीखों

हर एक लम्हे से तुम मिलो खोलें अपनी बाहें

हर एक पल एक नया समा देखे ये निगाहें

जो अपनी आखों में हैरानिया लेकर चल रहे हो तो जिन्दा हो तुम

दिलो में तुम अपनी बेताबियाँ लेकर चल रहे हो तो जिन्दा हो तुम

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